फट्टी चद्दर पर पैंबद नहीं, नई चद्दरों पर गलीचा बिछाने की तैयारी
कहां है सीसीटीवी कैमरों की जरूरत?
शहरी और भीड़-भाड़ वाले इलाकों को छोड़ निर्जन स्थान पर कैमरे लगाने का डाल दिया प्रस्ताव
डबवाली दर्पण
इसी सप्ताह मुख्यमंत्री की घोषणाओं को अमली जामा पहनाने के लिए नगर परिषद में चार अधिकारियों और 8 पार्षदों ने बैठक कर विकास की तहरीर लिखते हुए 10 करोड़ रूपये से शहर में होने वाले विकास कार्यों पर सहमति की मोहर लगा दी। इस 10 करोड़ रूपये में से साढ़े 5 करोड़ की राशि हुडा की सडक़ों का निर्माण करने के लिए प्रस्ताव डाल दिया गया तो वहीं बाकी बचे साढ़े चार करोड़ रूपये शहर की स्ट्रीट लाईटों सहित सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर भी मोहर लगा दी। जनता सरकार को भारी भरकम टैक्स अदा कर खजाने भरती है उस खजाने का किस प्रकार प्रयोग किया जाता है यह भी आमजन को जानने का अधिकार है। चंद अधिकारी और पार्षद इसका प्रयोग कैसे करते हैं इसकी भी आमजन को जानकारी लेनी चाहिए। सरकार द्वारा दिया गया पैसा सही जगह लगाया जा रहा है या नहीं इसकी भी जानकारी होना जरूरी है। यह जनता का अधिकार भी है।
अब साढ़े पांच करोड़ रूपये हुडा की सडक़ों पर खर्च करने का प्रस्ताव डाला गया तो वहीं जहां तक सीसीटीवी कैमरेे लगाने पर खर्च की जाने वाली राशि किस लोकेशन पर कितनी राशि खर्च की जानी है इसकी तो जानकारी नही है। मिली जानकारी के अनुसार रामबाग के निकट जहां मुख्य डंपिंग स्टेशन बनाया गया है और कई वर्षों से यहां शहर भर का कूड़ा डाला जा रहा है लेकिन नगर परिषद द्वारा इस डंपिंग स्टेशन पर आने वाले कूडें केे निस्तारण की कोई योजना आज तक नहीं बनाई गई लेकिन यहां कैमरे लगाने का प्रस्ताव जरूर डाल दिया गया।
इस इलाके में सीसीटीवी कैमरे यहां से गुजरने वाली रेलवे लाईन अथवा कूड़ा डालने के लिए आने वाले वाहनों अथवा डंपिंग स्टेशन पर नजर रखेंगे यह सोचने वाली बात है। दूसरी जो लोकेशन तय की गई है वह फायर बिग्रेड के आस-पास कैमरे लगाने की है। यह भी रामबाग की तरह निर्जन इलाका है। इस निर्जन इलाके में सीसीटीवी किसके लिए लगाए जा रहे हैं। इसका जवाब किसी के पास नही है। छिना-छपटी और लूटपाट की घटनााएं तो अकसर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में हो रही है। कॉलोनी रोड, मीना बाजार, गोल चौक, चौटाला रोड आदि ऐसे क्षेत्र हैं जहां अकसर दुघर्टनाएं और अन्य घटनाएं होती रहती हैं। इसी प्रकार लड़कियों के स्कूलों व कॉलेजों के आगे जिस तरह से आवारागर्द मंडराते हैं जरूरत तो वहां थी कैमरों की लेकिन ऐसी जगह का चयन किया गया जहां इससे किसी को कोई मतलब ही नहीं। ऐसे में अनेक सवाल खड़े हो जाते हैं कि आखिर इस बैठक में किस तरह के प्रस्ताव पारित किए गए और इसे पारित करने का पार्षदों और अधिकारियों की मंशा क्या है? इस पर पाठक विचार करें और ‘डबवाली दर्पण’ आपसे अनुरोध करता है कि इस विषय को लेकर अपने-अपने वार्ड के पार्षदों से सवाल जरूर करें।
इन बातों पर ध्यान देना नहीं जरूरी क्या?
डबवाली दर्पण
शहर में अतिक्रमण है,रिहायशी इलाकों में बंदरों का आंतक है, मृत पशुओं को उठाने का कोई साधन या विकल्प तक नही है। लेकिन परिषद में उक्त समस्याओं पर कभी गंभीरता से चर्चा तक नहीं की गई। हर ओर अतिक्रमण हो रहा है, अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं लेकिन इस तरफ नगर परिषद का कोई अधिकारी अथवा पार्षद ध्यान नहीं दे रहा है। सैंकड़ों बार शहर के लोग नगर परिषद में बंदरों से छुटकारा दिलाने के लिए गुहार लगा चुके हैं और परिषद की बैठक में बंदरों को पकडऩे के लिए प्रस्ताव तक डाले गए लेकिन यह प्रस्ताव फाइलों में ही धूल फांक रहे हैं। मृत पशुओं को उठाने का ठेका न दिए जाने के कारण अकसर लोगों को निजी रूप से पैसा खर्च कर उठवाना पड़ता है। यह भी प्रस्ताव अनेक बार डाला गया लेकिन परिणाम वहीं शून्य। विभिन्न बाहरी इलाकों में अवैध रूप से कॉलोनियां बसाई जा रही है। इसको लेकर भी नगर परिषद के अधिकारी आंखे मूंदे हुए हैं। यह अलग बात है कि जब करोड़ों खर्च करने की बात आती है तो तुरंत बैठक कर उस राशि को ठिकाने लगाने के लिए अनेक योजनाओं के प्रस्ताव डालकर उन्हें पास करवाने का काम भी तेजी से कर लिया जाता है, लेकिन जब जनहित के मुद्दों की बात आती है तो केवल प्रस्ताव डालकर अतिश्री कर ली जाती है और उपर के अधिकारियों पर बात डालकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
पंखों को तरसता फायर स्टेशन
डबवाली दर्पण
पिछले डेढ़ दशक से फायर सर्विस स्टेशन के कार्यालय में पंखें तक नहीं बदले गए। यहां कार्य करने वाले कर्मचारी 44 डिग्री तापमान में बिना पंखों के बैठने को मजबूर हैं। नगर परिषद को अनेक बार इस बाबत अवगत करवा चुके हैं फायरकर्मी लेकिन हर बार टाल-मटोल रवैया अपनाते हुए बैठक में प्रस्ताव रखने की बात कहकर टाल दिया जाता है। ऐसे अनुमान लगा लें किन नगर परिषद की हालत क्या है?
कहां है सीसीटीवी कैमरों की जरूरत?
शहरी और भीड़-भाड़ वाले इलाकों को छोड़ निर्जन स्थान पर कैमरे लगाने का डाल दिया प्रस्ताव
डबवाली दर्पण
अब साढ़े पांच करोड़ रूपये हुडा की सडक़ों पर खर्च करने का प्रस्ताव डाला गया तो वहीं जहां तक सीसीटीवी कैमरेे लगाने पर खर्च की जाने वाली राशि किस लोकेशन पर कितनी राशि खर्च की जानी है इसकी तो जानकारी नही है। मिली जानकारी के अनुसार रामबाग के निकट जहां मुख्य डंपिंग स्टेशन बनाया गया है और कई वर्षों से यहां शहर भर का कूड़ा डाला जा रहा है लेकिन नगर परिषद द्वारा इस डंपिंग स्टेशन पर आने वाले कूडें केे निस्तारण की कोई योजना आज तक नहीं बनाई गई लेकिन यहां कैमरे लगाने का प्रस्ताव जरूर डाल दिया गया।
इस इलाके में सीसीटीवी कैमरे यहां से गुजरने वाली रेलवे लाईन अथवा कूड़ा डालने के लिए आने वाले वाहनों अथवा डंपिंग स्टेशन पर नजर रखेंगे यह सोचने वाली बात है। दूसरी जो लोकेशन तय की गई है वह फायर बिग्रेड के आस-पास कैमरे लगाने की है। यह भी रामबाग की तरह निर्जन इलाका है। इस निर्जन इलाके में सीसीटीवी किसके लिए लगाए जा रहे हैं। इसका जवाब किसी के पास नही है। छिना-छपटी और लूटपाट की घटनााएं तो अकसर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में हो रही है। कॉलोनी रोड, मीना बाजार, गोल चौक, चौटाला रोड आदि ऐसे क्षेत्र हैं जहां अकसर दुघर्टनाएं और अन्य घटनाएं होती रहती हैं। इसी प्रकार लड़कियों के स्कूलों व कॉलेजों के आगे जिस तरह से आवारागर्द मंडराते हैं जरूरत तो वहां थी कैमरों की लेकिन ऐसी जगह का चयन किया गया जहां इससे किसी को कोई मतलब ही नहीं। ऐसे में अनेक सवाल खड़े हो जाते हैं कि आखिर इस बैठक में किस तरह के प्रस्ताव पारित किए गए और इसे पारित करने का पार्षदों और अधिकारियों की मंशा क्या है? इस पर पाठक विचार करें और ‘डबवाली दर्पण’ आपसे अनुरोध करता है कि इस विषय को लेकर अपने-अपने वार्ड के पार्षदों से सवाल जरूर करें।
इन बातों पर ध्यान देना नहीं जरूरी क्या?
डबवाली दर्पण
शहर में अतिक्रमण है,रिहायशी इलाकों में बंदरों का आंतक है, मृत पशुओं को उठाने का कोई साधन या विकल्प तक नही है। लेकिन परिषद में उक्त समस्याओं पर कभी गंभीरता से चर्चा तक नहीं की गई। हर ओर अतिक्रमण हो रहा है, अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं लेकिन इस तरफ नगर परिषद का कोई अधिकारी अथवा पार्षद ध्यान नहीं दे रहा है। सैंकड़ों बार शहर के लोग नगर परिषद में बंदरों से छुटकारा दिलाने के लिए गुहार लगा चुके हैं और परिषद की बैठक में बंदरों को पकडऩे के लिए प्रस्ताव तक डाले गए लेकिन यह प्रस्ताव फाइलों में ही धूल फांक रहे हैं। मृत पशुओं को उठाने का ठेका न दिए जाने के कारण अकसर लोगों को निजी रूप से पैसा खर्च कर उठवाना पड़ता है। यह भी प्रस्ताव अनेक बार डाला गया लेकिन परिणाम वहीं शून्य। विभिन्न बाहरी इलाकों में अवैध रूप से कॉलोनियां बसाई जा रही है। इसको लेकर भी नगर परिषद के अधिकारी आंखे मूंदे हुए हैं। यह अलग बात है कि जब करोड़ों खर्च करने की बात आती है तो तुरंत बैठक कर उस राशि को ठिकाने लगाने के लिए अनेक योजनाओं के प्रस्ताव डालकर उन्हें पास करवाने का काम भी तेजी से कर लिया जाता है, लेकिन जब जनहित के मुद्दों की बात आती है तो केवल प्रस्ताव डालकर अतिश्री कर ली जाती है और उपर के अधिकारियों पर बात डालकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
पंखों को तरसता फायर स्टेशन
डबवाली दर्पण
पिछले डेढ़ दशक से फायर सर्विस स्टेशन के कार्यालय में पंखें तक नहीं बदले गए। यहां कार्य करने वाले कर्मचारी 44 डिग्री तापमान में बिना पंखों के बैठने को मजबूर हैं। नगर परिषद को अनेक बार इस बाबत अवगत करवा चुके हैं फायरकर्मी लेकिन हर बार टाल-मटोल रवैया अपनाते हुए बैठक में प्रस्ताव रखने की बात कहकर टाल दिया जाता है। ऐसे अनुमान लगा लें किन नगर परिषद की हालत क्या है?


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