गलती से यदि किसी रोड अथवा गली का निर्माण आरंभ हो जाए तो उसमें वही के निवासी रोड़ा बन जाते हैं, यही  कहानी है बलदेव जलेबी वाली गली की 
 डबवाली दर्पण  न्यूज़ :-                                                                                                                                
 डबवाली, शहर की गलियों की चर्चा छेड़ी है तो अब इसे पूरे अंजाम तक पहुँचने मैं क्यों पीछे रहें ताकि शहर के लोगों को इसकी जानकारी तो मिल सके कि गलियों का निर्माण न हो पाने के पीछे केवल नगर परिषद अथवा अन्य अन्य विभागों के अधिकारी ही नहीं बल्कि आमजन भी इसमें बराबर की भूमिका अदा करता है शहर की 95 गलियों को नगर परिषद की बैठक में बार-बार प्रस्ताव डाला जाता है लेकिन यहप्रस्ताव टेंडर प्रक्रिया तक नहीं पहुंचा पाते इसका कारण चाहे जो भी हो लेकिन यह बात तो सच है की जहां अधिकारी अपना काम निष्ठा व ईमानदारी से नहीं करते तो वहीं आमजन भी इसके खिलाफ किसी तरह की आवाज़ नहीं उठता आमजन की भी कोई जिमेवारी होती हैं इससे अनभिज्ञ हैं यहां की लोग आमजन को यह तो पता ही हैं की शहर में जो मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी है उन सुविधाओ के लिए जहां से विभाग धन अर्जित करते है वह धन आमजन की ही जेब से निकलता है चाहे वह प्रॉपटी टैंक्स हो अथवा अन्य तरह के कर लेकिन आमजन अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर रहे यहीं कारण है कि अधिकारी अपनी मर्जी से कायोँ को 
अंजाम देते हैं विभागीय अधिकारियों का बस यहीं कहना होता हे कि काम तो सिस्टम के हिसाब से होगा पाषर्दों के साथ मिलकर प्रस्ताव पारित कर दिया गया है, एस्टीमेट बना दिया गया है और वर्क ओडेर तो ऊपर से है माना की वर्क ओडेर ऊपर से होना है लेकिन यह काम करवाने की जिमेवारी भी तो  किसी की होगी इसे जाहिर नहीं  किया जाता जब गलियों के निमार्ण की बात चली है तो आज आपको रेलवे पाटक क्रॉस करते ही सब्जी मंडी की और जाने वाले तीन वर्ष पूर्व इस आधी गली का निर्माण कर दिया गया काम रोकने का जो कारण सामने आया है वह यह की इस गली को पुरानी सतह से एक से डेढ़ फुट ऊंची उठा दिया गया

                                     जैसे-जैसे गली निर्माण आगे बड़ा तो आधे तक पहुँचने के बाद बंद हो गयाइसका मूल कारण यहां के निवासियों द्वारा यह कहकर एतराज जताया गया की सड़क ऊंची बनेगी तो उनकी इमारते नीची हो जाएगी। अब इस गली का बाकी निर्माण कैसे और किस तरह होंगे यह पाठक स्वयं ही अनुमान लगा लें




















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