साक्षरता का उजियारा फैला रहा बाल मंदिर स्कूल
शिक्षा के साथ-साथ सेवाभाव, देश पे्रम की अलख जगा रहा, हरे-भरे वातावरण में शिक्षा से सरोबार ठोस इरादों के साथ आगे बढ़ रहा बचपन
जरूरी नहीं रोशनी चिरागों से ही हो, शिक्षा से भी घर रौशन होते हैं।

डबवाली दर्पण हर घर शिक्षा रूपी चिराग जगमगाए इसी इरादे को लेकर
बाल मंदिर स्कूल के पायदान की सीढिय़ा आसमान की ओर बढऩे लगी हैं। न जाने कितने इंजीनियर, कितने प्रशासनिक अधिकारी, प्रतिभावान खिलाड़ी, राजनीतिज्ञ और कुशल व्यवसायिक, चिकित्सक इस शिक्षा के मंदिर की दहलीज पार कर देश की सेवा करने का जब्बा लेकर आसमान की ऊंचाईयां छूते हुए देश व प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं । बाल मंदिर स्कूल में अनेक प्रतिभाओं के रंग भरे हैं और अब भी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ रहा है। हो सकता है कि पूर्व में इस शिक्षण संस्थान में बेहतर शिक्षा की सुविधाएं कम रही हों लेकिन वर्तमान में बाल मंदिर स्कूल हर सुविधाओं से परिपूर्ण नजर आता है। शिक्षा के लिए उचित माहौल जो बच्चों को नहीं बल्कि अभिभावकों को भी आकर्षित करता दिखाई पड़ता है।
लगभग 6 एकड़ में प्रदूषित वातारण से दूर हरियाली से सरोबार, खिलते फूलों की फुलवाड़ी में अठखेलियां करते बच्चे इसकी सुंदरता में और अधिक चार चांद लगाते जान पड़ते हैं। पिछले 55 वर्षों में सीबीएसई बोर्ड से जुड़ा यह बाल मंदिर मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल अपने भीतर से ऐसी प्रतिभाओं को कुशल मार्ग दिखाकर उनके जीवन में शिक्षा रूपी रंगों से सरोबार करते हुए अनेक क्षेत्रों में प्रतिभा का जौहर दिखाने वाली शख्सियतों को उज्जवल भविष्य की राह दिखा चुका है। वर्तमान में लगभग 1600 विद्यार्थियों और लगभग 80 शिक्षकों की फुलवाड़ी से सजा यह स्कूल बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रिंसीपल एसके कौशिक व सचिव नीरज जिंदल के मार्गदर्शन में आधुनिक शिक्षा पद्दति की ओर अग्रसर है। शिक्षा के साथ-साथ फुटबाल, क्रिकेट, टेबल टेनिस, जूडो कर्राटे, ताइक्वोंडों, मार्शल आर्टस, किक बाक्सिंग, चैस सहित लगभग सभी खेलों के लिए हर सुविधा उपलब्ध करवाई गई है तो वहीं प्रशिक्षण के लिए बेहतरीन प्रशिक्षकों की नियुक्ति भी गई है। अब बात करें संगीत व नृत्य की तो उसमें रूचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए भी उचित व्यवस्था की गई है। शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी बच्चों को प्रेरित करने के लिए अलग से प्रबंध किए गए हैं ताकि बच्चे अपनी गहन रूचि के अनुसार उस क्षेत्र में अग्रसर हो सकें। प्रिंसीपल सुरेन्द्र कुमार कौशिक स्कूल के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताते हैं कि विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रूझान को कायम रखने के लिए वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक ज्ञान बढ़ाने के उदेश्य से शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जाता है। इसके अतिरिक्त पर्यावरण के प्रति रूझान उत्पन्न करने के उदेश्य से पेड़ पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रत्येक कक्षा को एक पौधा समर्पित किया जाता है। सभी कक्षाओं के बच्चे अपने-अपने पौधों की देखभाल करते हैं। सुरेन्द्र कौशिक कहते हैं कि बाल मंदिर स्कूल के छात्रों की क्षमताओं और योग्यताओं का पूर्ण रूप से विकास करना ही उनका मुख्य ध्येय है। इसके लिए प्रत्येक माह अभिभाव-शिक्षक बैठक में छात्रों के विषय में विस्तृत चर्चा की जाती है। अभिभावकों के सहयोग से ही विद्यार्थी सही दिशा प्राप्त कर लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर होते हैं। उच्चकोटि की शिक्षा, अच्छे संस्कार, उच्च नैतिक मूल्य, परिवारिक परिवेश, अनुशासन की भावना आदि विशेषताओं के कारण ही बाल मंदिर में विद्यार्थी मैडिकल, आईआईटी,एनडीए जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं विभिन्न क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने की ओर बढ़ रहे हैं।
विद्यार्थियों में अनुशासन व सौहार्द की भावना एवं सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करके लिए प्रत्येक वर्ष वार्षिकोत्सव का आयोजन किया जाता है। संस्कृति एवं संस्कारों से अवगत करवाने के लिए सभी भारतीय त्यौहारों को श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया है , ताकि बच्चों में एकता और संस्कृति की भावना उत्पन्न की जा सके।
स्कूल प्रबंधकों से भरपूर मिला सम्मान: कौशिक
डबवाली दर्पण
हरियाणा के करनाल जिले में स्थित कुंजपुरा सैनिक स्कूल से सेवानिवृत होकर बाल मंदिर स्कूल के प्रिंसीपल के पद पर पिछले पांच वर्ष से कार्य कर रहे सुरेन्द्र कुमार कौशिक कहते है कि स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा भरपूर सम्मान दिया गया। यहां नियुक्त होने के बाद जिस प्रकार का सम्मान और सौहार्द मिला उसी के बूते शिक्षण संस्थान को प्रगति के रास्ते पर ले जाने की ललक और भी अधिक बढ़ गई। उन्होंने बताया कि इस शिक्षण संस्थान को बेहतर बनाने के लिए वह कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कौशिक ने कहा कि आज की शिक्षा पद्दति भी आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो गई है। इसलिए बच्चों को जो घर में सुविधाएं मिलती है वह सभी सुविधाएं स्कूल में ही उपलब्ध करवाई जा रही है जिसके कारण बच्चों का शिक्षा के प्रति रूझान और अधिक बढ़ रहा है।
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विद्यार्थियों में कला की उमंग को पूरा करने का अवसर प्रदान किया जाता है। विद्यार्थी पेटिंग के माध्यम से अपने मन के भाव उजागर कर शिक्षा और देश प्रेम की अभिव्यक्ति को जाहिर करते है । उन्हें पूरी तरह स्वतंत्रता के साथ कला को निखारने का अवसर दिया जाता है।
आत्म रक्षा के गुर को दी जा रही तरजीह
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स्वयं की रक्षा के लिए आजकल आत्म रक्षा के गुर सीखना भी अंत्यत आवश्यक है। इसी के मद्देनजर बाल मदिर स्कूल के बच्चों को जूडो कर्राटे, ताइक्ंवाडों, मार्शल आर्ट के साथ-साथ अन्य तरीकों का भी समावेश किया जा रहा है।
संगीत की धुनों को उतार रहे दिलों में
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बाल मंदिर स्कूल के विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ संगीत ज्ञान को भी दिलो-दिमाग में पूरी तरह से उतार रहे हैं। स्कूल प्रबंधकों द्वारा संगीत का प्रशिक्षण देने के लिए अनुभवी संगीताज्ञों की नियुक्ति की हुई है। बच्चों में संगीत सिखने की बलवती इच्छा को पूरा करने का दायित्व भी पूरा किया जा रहा है। बच्चे कक्षा समाप्ति के बाद संगीत की धुनों से स्वयं की कला में निखार ला रहे हैं।
एक नजर बाल मंदिर स्कूल की अन्य उपलब्धियों पर
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स्कूल की उपलब्धियों की बात की जाए तो बीते वर्ष बाल मंदिर स्कूल के 10वीं कक्षा के छात्रों ने बौद्धिक क्षमता का परिचय देते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया। कुल 12 छात्रों ने ए-2, 14 ने बी-1 और 13 छात्रों बी-2 ग्रेड लेकर कुल 51 छात्रों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उतीर्ण कर स्कूल का नाम रोशन किया। छात्र प्रत्यूष बांसल का आईआईटी दिल्ली में चयन हुआ। नीट एमबीबीएस में दमींदर एवं आरूष ने चयनित होकर विद्यालय के गौरव को बढ़ाया। नीट बीडीएव में विवेक, सौरव व दीक्षा ने प्रवेश लेकर विद्यालय का मना बढ़ाया। ऐशल अग्रवाल व सुनिधि ने थापर विश्वविद्यालय ने पेक चंडीगढ़ में दाखिला लेकर विद्यालय के विजय रथ को गति दी। कुछ दिन पूर्व ही इसी स्कूल की छात्रा प्रतिभा बांसल ने पटियाला मेडिकल कॉलेज से 67.5 प्रतिशत अंकों के साथ एमबीबीएस की परीक्षा उर्तीण कर चिकित्सक की उपाधि प्राप्त करने में सफल रही। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल का नाम रोशन करने के साथ-साथ शरीरिक क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए विद्यार्थियों को विभिन्न खेलों में पारंगत किया जाता है। वशु में अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर इंडो लंका कि बाक्सिंग प्रतियोगिता में बाल मंदिर की गुरजोत व सोनू ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया तो वहीं कर्मदीप व एकमजोत ने कांस्य पदक झटका। जिला स्तरीय वशु प्रतियोगिता में कर्मदीप कौर, एकजोत कौर, खुशमिन कौर, नवदीप सिंह, फतेहकरण सिंह, परमजीत कौर, हरलीन कौर व हसरत ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पंजाब स्कूल खेल में अंडर 19 क्रिकेट में स्वर्ण पदक नरिन्द्र कुमार ने हासिल किया। हरमनदीप सिंह ने स्वर्ण तथा निर्मल जीत सिंह ने कांस्य पद प्राप्त कर स्कूल का नाम रोशन किया। इसके अतिरिक्त स्कूल इतिहास अन्य उपलब्धियों से पूरी तरह भरा पड़ा है।

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